नीतीश जी, 34540 शिक्षकों की यह सूची फर्ज़ी है

कहते हैं देर आए, दुरुस्त आए. लेकिन बिहार में प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया देर से आई, लेकिन दुरुस्त नहीं आई. सालों का समय लगा. हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में मामला सालों तक चला. कई-कई बार सूची तैयार की गई. कहा गया कि अब जो सूची बनी है, वो फाइनल है. इसी आधार पर नियुक्ति होगी. लेकिन इस सूची की पड़ताल करने पर चौथी दुनिया को जो तथ्य मिले, उससे इस सूची पर कई सवाल ख़डे होते हैं. चौथी दुनिया की पड़ताल बताती है कि इस सूची में, जिसमें 34540 शिक्षकों को ज़िला आवंटित किया गया है, भारी गड़ब़डी है. अनियमितताएं है. फर्ज़ीवाड़ा है. चौथी दुनिया की एक्सक्लुसिव रिपोर्ट:

क्रम संख्या-27167. अप्लिकेशन आईडी है ओपी 201006057. नाम-वैद्यनाथ रजक. पिता का नाम-देवनारायण रजक. जन्म तिथि 15/5/1971. पता-मुरलीगंज, गोल बाज़ार, वॉर्ड नंबर 9, पीओ+पीएस मुरलीगंज, मधेपुरा. सत्र है 1989-91 का, एससी कोटे से है और इन्हें मधेपुरा ज़िला अलॅाट किया गया है. अब ज़रा इस नाम पर भी ग़ौर करें. क्रम संख्या-27168. अप्लिकेशन आईडी है ओपी 2010104669. इनका भी नाम वैद्यनाथ रजक है. पिता का नाम भी देवनारायण रजक है. इनकी जन्मतिथि भी 15/5/1971 है. इनका भी पता-मुरलीगंज, गोल बाजार, वॉर्ड नंबर 9, पीओ+पीएस मुरलीगंज, मधेपुरा है. सत्र समान है, 1989-91 का. ये भी एससी कोटे से हैं और इन्हें भी मधेपुरा ज़िला अलॅाट किया गया है. सिवाए क्रम संख्या और अप्लिकेशन आईडी के सब कुछ समान है. यानी, इन्होंने दो आवेदन जमा किए थे और बिहार सरकार को शायद कुछ विशेष लगा हो, जिसकी वजह से वैद्यनाथ रजक को दो ज़िले में एक साथ नियुक्त करने जा रही है. ये जनाब एक साथ दो स्कूल में बच्चों को पढाएंगे. इसी तरह, बांका के मोरामा क्षेत्र के पिपराडीह गांव के पवन कुमार भी हैं. इनके क्रम संख्या 31260 और 31261 पर गौर करें. सिवाए दो आवेदन संख्या के इन दो नामों में, पते में, पिता के नाम में, सत्र में, जन्मतिथि में, कोटे में और आवंटित ज़िले में कोई अंतर नहीं है. यानी, एक ही पवन कुमार ने दो आवेदन पत्र जमा किए और इन्हें भी बिहार सरकार दो जगह नियुक्त करने जा रही है.

एक और उदाहरण देखते हैं. क्रम संख्या-23693 पर ग़ौर करें. अप्लिकेशन आईडी है ओपी 201000775. नाम-वकील पासवान. पिता का नाम-रामायण पासवान. जन्म तिथि 19/5/1962. गांव रोपी, पोस्ट अकोढा, दिनारा, रोहतास. सत्र है 1986-87 का, एससी कोटे से हैं और इन्हें रोहतास ज़िला अलॅाट किया गया है. अब ज़रा इस नाम पर भी गौर करें. क्रम संख्या-25788. अप्लिकेशन आईडी है ओपी 201047481. नाम-वकील पासवान. पिता का नाम-रामायण पासवान. जन्म तिथि 8/5/1962. गांव खापी, पोस्ट अकोघा, दिनारा, रोहतास, इनका भी सत्र 1987 है और एससी कोटे से हैं. और इन्हें भी रोहतास ज़िले में नियुक्त किया जाएगा. सिवाए जन्मतिथि के इस दोनों नामों में कोई अंतर नहीं है. गांवों के दो नाम रोपी और खापी में से किसी एक के अस्तित्व पर भी संदेह है.

इस तरह के कुछ और नाम भी है जो इस खबर के साथ लगाए गए हैं. लेकिन ये नाम स़िर्फ चावल से भरी हांडी के कुछ दाने भर हैं. चौथी दुनिया ने स़िर्फ चंद नामों को सामने लाकर इस सूची की विश्वसनियता पर सवाल उठाने की कोशिश की है. सरकार यदि सचमुच गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर गंभीर होती तो इस तरह की लापरवाही सामने नहीं आती. हो सकता है कि सरकार ये दलील दे कि हम जिन शिक्षकों को नियुक्त कर रहे हैं, उन्हें एक साल के भीतर नियमित किया जाएगा और इस बीच में कोई ग़लत तथ्य सामने आया तो उक्त नियुक्त शिक्षक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. लेकिन सवाल यहां ये है कि सालों की मेहनत के बाद भी आ़खिर इस दोषपूर्ण सूची को बनाने के लिए ज़िम्मेदार कौन लोग हैं? सवाल सूची बनाने वालों की क़ाबिलियत और नीयत पर भी उठता है. अगर मानवीय भूल की वजह से ये ग़लती हुई हो तब भी सवाल उठता है कि क्या बिहार सरकार 34 हज़ार शिक्षकों की सही लिस्ट तक नहीं बना सकती? क्या उसके पास स्टाफ की कमी है? क्या उसके पास काबिल लोग नहीं हैं? और अगर ये ग़लतियां जानबूझ कर की गई हैं तो सीधे-सीधे सरकार को इसकी ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए. कारवाई तो दोनों ही स्थितियों में होनी चाहिए. और अब भी सरकार के पास मौक़ा है कि वो अपनी साख बचा ले. इस सूची को फिर से बनवाए और पूरी ईमानदारी से बनवाए, अपनी निगरानी में बनवाए ताकि उन लोगों को न्याय मिल सके जो इस फर्ज़ीवा़डे की वजह से अन्याय के शिकार हुए हैं.

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2 Responses to “नीतीश जी, 34540 शिक्षकों की यह सूची फर्ज़ी है”

  • श्रीमान जी , यह जो लिस्ट सरकार ने जारी की है, उसमें ऐसे भी नाम हैं जिन्होनें बी एड किया हीं नही।

  • ashok says:

    aapka lekh dekhkar aisa laga ki sabhi patarkar dalal nahi hote hai kiyoki ki aajkal bihar me sabhi midiya ke log nitis ke jaykara me lage hue hai thans

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